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New Education Policy: साल में 2-3 बार होंगी परीक्षाएं, शिक्षक, छात्र और अभिभावकों के लिए अहम खबर

PNN India: नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि कैबिनेट बैठक में आज नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. 34 साल बाद नई श‍िक्षा नीति में बदलाव किया गया है.

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नई शिक्षा नीति (एनईपी) में बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाया गया है. छात्रों में परीक्षाओं के दबाव को कम करने के लिए ये किया गया गया है. नई श‍िक्षा नीति के अनुसार कक्षा 10 और 12 के लिए बोर्ड परीक्षा जारी रखी जाएगी. श‍िक्षा नीति के अनुसार बोर्ड समय के साथ बोर्ड परीक्षाओं के आगे व्यवहार्य मॉडल भी विकसित कर सकते हैं, जैसे कि – वार्षिक / सेमेस्टर / मॉड्यूलर बोर्ड परीक्षा होगी.

1) उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए होगा कॉमन एंट्रेंस एग्जाम
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का ऑफर दिया जाएगा. यह संस्थान के लिए अनिवार्य नहीं होगा.

2) मल्टिपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम की मिलेगी सुविधा, बिना M.Phil के सीधा PhD कर सकते हैं

मल्टिपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी. 4साल का डिग्री प्रोग्राम फिर M.A. और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा PhD कर सकते हैं.

3) बोर्ड परीक्षा पैटर्न में होगा बदलाव

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाने के लिए प्रावधान बनाए जाएंगे, बोर्ड्स परीक्षाओं को लेकर छात्रों के साथ-साथ माता-पिता भी बहुत तनाव में रहते हैं, जिसे कम करने की बात कही गई है. एनईपी के अनुसार, ग्रेड 10 और 12 के लिए बोर्ड परीक्षा जारी रखी जाएगी.

बोर्ड परीक्षा को ‘आसान’ बनाया जाएगा, क्योंकि वे कोचिंग या याद रखने के बजाय मुख्य रूप से मुख्य क्षमताओं, दक्षताओं का परीक्षण करेंगे. एनईपी ने बताया कि NCERT द्वारा SCERTs, बोर्डों ऑफ़ असेसमेंट (BoAs), और PARAKH, प्रस्तावित नए राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र आदि के साथ दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे,

4) शिक्षकों के लिए पेशेवर मानक लागू किया जाएगा
नई शिक्षा नीति का एक मुख्य आकर्षण शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों (एनपीएसटी) का एक सामान्य मार्गदर्शक सेट है जो 2022 तक राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा विकसित किया जाएगा. नीति यह भी बताती है कि NCTE को एक सामान्य शिक्षा परिषद (GEC) के तहत एक पेशेवर मानक सेटिंग बॉडी (PSSB) के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा.

नीति यह भी बताती है कि 2030 तक शिक्षक शिक्षा को धीरे-धीरे बहु-विषयक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। 2030 तक, शिक्षण के लिए न्यूनतम डिग्री योग्यता 4-वर्षीय एकीकृत बी.एड. डिग्री हो जाएगी.

2-वर्षीय बी.एड. कार्यक्रम केवल उन लोगों के लिए भी प्रस्तुत किए जाएंगे जिन्होंने पहले से ही अन्य विशिष्ट विषयों में स्नातक डिग्री प्राप्त की है। एडाप्टेड 1-वर्षीय बी.एड. उन लोगों के लिए कार्यक्रम जिन्होंने 4-वर्षीय बहु-विषयक बैचलर डिग्री के समकक्ष पूरा कर लिया है या जिन्होंने एक विशेषता में मास्टर डिग्री प्राप्त की है और उस विशेषता में विषय शिक्षक बनने की इच्छा रखते हैं.

ओपन डिस्टेंस लर्निंग के लिए मान्यता वाले बहु-विषयक उच्च शिक्षा संस्थान भी उच्च-गुणवत्ता वाले बी.एड. मिश्रित या ओपन डिस्टेंस लर्निंग ODL मोड कोर्स करवा सकेंगे.

5) संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं पर दिया जाएगा जोर
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बुधवार को मंजूर की गई नई शिक्षा नीति (NEP) में संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं पर महत्वपूर्ण जोर देते हुए भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान (IITI) की स्थापना का प्रस्ताव है.

एनईपी और आईआईटीटी के अनुसार स्थापित किया जाएगा जो इसके अनुवाद और व्याख्या प्रयासों में सहायता के लिए प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग करेगा. नीति की एक अन्य विशेषता यह है कि संस्कृत को स्कूल में मजबूत प्रसाद के साथ “मुख्यधारा” बनाया जाएगा – जिसमें तीन-भाषा सूत्र में भाषा के विकल्पों में से एक – साथ ही उच्च शिक्षा भी शामिल है. संस्कृत विश्वविद्यालय भी उच्च शिक्षा के बड़े बहु-विषयक संस्थान बनने की ओर अग्रसर किए जाएगे. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं को भी शिक्षा जगत में बढवा देने की बात कही गई है.

6) व्यावसायिक शिक्षाओं को नई शिक्षा नीति के दायरे में लाया गया है
नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है.

7) जीडीपी का 6% हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र में लगाया जाएगा
सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6% शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43% है. इसमें बढ़ोतरी करके शिक्षा का क्षेत्र बढ़ाया जाएगा.

8) U.S. की NSF (नेशनल साइंस फाउंडेशन) की तर्ज पर NRF (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) का होगा गठन
U.S. की NSF (नेशनल साइंस फाउंडेशन) की तर्ज पर हम NRF (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) ला रहे हैं। इसमें न केवल साइंस बल्कि सोशल साइंस भी शामिल होगा। ये बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा। ये शिक्षा के साथ रिसर्च में हमें आगे आने में मदद करेगा. इसके अलावा ये बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा.

9) स्कूल से लेकर कॉलेज तक 5+3+3+4 पैटर्न पर होगी पढ़ाई
नयी शिक्षा नीति में सरकार ने छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा है. इसके लिए 3 से 18 साल के छात्रों के लिए 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है. इसके तहत छात्रों की शुरुआती स्टेज की पढ़ाई के लिए 5 साल का प्रोग्राम तय किया गया है. इनमें 3 साल प्री-प्राइमरी और क्लास-1 और 2 को जोड़ा गया है. इसके बाद क्लास-3, 4 और 5 को अगले स्टेज में रखा गया है. इसके अलावा क्लास-6, 7, 8 को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है. आखिर क्लास-9, 10, 11, 12 को हाई स्टेज में रखा गया है.

10) लड़कियों के लिए भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा, कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय का होगा विस्तार
लड़कियों की शिक्षा जारी रहे इसके लिए उनको भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण देने का सुझाव दिया गया है. कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय का विस्तार 12वीं तक करने का सुझाव नई शिक्षा नीति-2019 के मसौदे में किया गया है.

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Shafi-Author

Shafi Shiddique