PNN/ Faridabad: पर्यावरण संरक्षण एवं  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिला स्तर पर पूर्ण ईकाईयां स्थापित की जाएंगी। अभी तक यह बोर्ड केवल प्रदूषण को रोकने का काम ही जिलास्तर पर कर रहा है। जब कि पर्यावरण संरक्षण का काम चंडीगढ़ में होता है। पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार जल्दी ही पर्यावरण संरक्षण की यूनिट भी जिला लेवल पर स्थापित करेगी।

प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को दोपहर बाद मानव रचना विश्वविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं दक्षिणा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित पर्यावरण चुनौतियां एवं समाधान विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर संबोधित करते हुए यह घोषणा की। सम्मेलन के दूसरे दिन सभागार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण की दिशा में बहुत से नए कार्यक्रम शुरू किए हैं। जल संरक्षण के लिए धान की फसल का रोपाई क्षेत्र प्रदेश में पचास हजार हैक्टेयर कम हो गया है। किसानों ने स्वेच्छा से धान लगाना छोड़ दिया है। एक किलो धान उत्पादन में पांच हजार लीटर पानी खर्च हो जाता है। सरकार की पहल पर कुछ लोगों ने तो चावल खाना तक छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार वृक्षारोपण की एक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों को एक पौधे के पालन-पोषण पर तीन वर्ष में तीन सौ रूपए दिए जाते हैं। यह इसलिए कि तीन वर्ष तक पौधे की देखभाल होती रहे। मनोहर लाल ने कहा कि आमतौर पर पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण पर अंकुश लगाने की तकनीक काफी मंहगी होती हैं। सरकार की स्टार्ट अप जैसी योजनाओं व प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप कुछ ऐसे गैर सरकारी संगठन, समाजसेवी व शिक्षण संस्थाएं हैं, जिन्होंन पर्यावरण अनुसंधान में सराहनीय कार्य करते हुए नए अविष्कार किए हैं। जो कि काफी सुलभ हैं। अनेक महिलाओं ने भी अपनी रचनाधर्मिता दिखाते हुए पंचभूत तत्वों के संरक्षण की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारी मित्र है और इसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। यूएनओ ने भी इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण को संरक्षित रखना जरूरी है। दोनों में संतुलन होगा, तभी मानव जीवन सुरक्षित रह सकता है।