अध्यापक होने पर मुझे गर्व है: सुनीता सैनी

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PNN: मैं एक अध्यापक होने पर गर्व करती हूँ. और गर्व होनी भी चाहिए क्योंकि मैं उन विद्यार्थियों को उनकी मंजिल पर पहुंचते हुए देखती हूं जिन्हें मैंने शिक्षा दी थी.

शिक्षक का अर्थ मात्र अध्यापक से ही नहीं होता जो केवल बच्चों को अंतर्ज्ञान प्रदान करें बल्कि वह तो बच्चों का भविष्य भी बनाता है. शिक्षक अपने विद्यार्थी को केवल कामयाब ही नहीं बनाता बल्कि उसको ईमानदार, अनुशासनप्रिय, संस्कारशील और देशभक्त भी बनाता है.

जिस प्रकार एक डॉक्टर मरीज का सेवा करता है, किसी को नया जीवन देता है. इंजीनियर कुछ नया इनोवेंट करता है. सैनिक देश की रक्षा करता है और इन सब को शिक्षा देने वाला एक शिक्षक ही होता है.

गुरुकुल शिक्षा में भी गुरु व शिष्य परंपरा रही है. शिष्य अपने गुरु की परंपरा को आगे बढ़ाता है. वह गुरु के ज्ञान को आत्मसात करता है, और मौखिक परंपरा से हजारों वर्षों से उसे आगे बढ़ाया है. बिना पुस्तकों के भी उस समय ज्ञान प्राप्त होता था.

भारतीय समाज में अनेक गुरु हुए हैं जैसे द्रोणाचार्य, चाणक्य, अभिमन्यु, शंकराचार्य जिनके शिष्यों ने उन्हें अमर कर दिया.

आज भी प्रत्येक अध्यापक यह इच्छा रखता है, “सुपर-30” को आज कौन नहीं जानता, आज देश के प्रत्येक शिक्षक का सपना “आनंद कुमार” जैसा शिक्षक बनना है ताकि उसके शिष्य द्वारा उसकी पहचान हो.

आज हम डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, देश के शिक्षाविद के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं, क्योंकि उनका मानना था कि देश के निर्माण में शिक्षक का अहम रोल होता है.

सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक सुभकामनाएं !

लेखक- सुनीता सैनी (प्रिंसिपल, मॉडर्न शाईन) का अपना विचार है.