गर्भावस्था में स्वाइन फ्लू से पीड़ित महिला ने फोर्टिस अस्पताल में स्वस्थ्य जुड़वा बच्चों को दिया जन्म

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PNN/ Faridabad:फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने 34 वर्षीय पूजा का जो गर्भावस्था की 8वीं महीने में H1N1 से पीड़ित थी का सफल उपचार किया है. पूजा को तेज बुखार नकसीर और पेट में तेज दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
डॉ इंदु तनेजा एचआरडी एवं सीनियर कंसलटेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गाइनेकोलॉजी के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने पूजा का सफल इलाज किया, और उसे स्वास्थ्यलाभ तथा सुरक्षित प्रसव का लाभ दिलाया. अस्पताल में भर्ती होने पर पूजा की पूरी मेडिकल जांच की गई. जिससे उन्हें H1N1 (स्वाइन फ्लू) पॉजिटिव की पुष्टि हुई. मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स काफी कम हो चुकी थी. वह 8 माह के गर्भ से थी और जुड़वा बच्चे उनके गर्भ में पल रहे थे. इस बीच पूजा के शरीर में इंफेक्शन फैलने लगा था, जिसकी वजह से उन्हें सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी. फेफड़ों की क्षमता प्रभावित होने से शिशुओं को भी कम ऑक्सीजन मिल रही थी. ऐसे में मां और बच्चों का जीवन बचाने के लिए इमरजेंसी सिजेरियन डिलीवरी कराई गई. मरीज को सर्जरी के दौरान प्लेटलेट्स और ब्लड भी चढ़ाना पड़ा. यह काफी जोखिम वाला मामला था. क्योंकि मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स काफी कम हो चुके थे, और साथ ही वह तेज बुखार से जूझ रही थी. उस पर गर्भ में जुड़वा बच्चों का होना तथा सांस लेने में कठिनाई भी मामले को गंभीर बना रही थी.
डॉ इंदु तनेजा एचओडी एवं सीनियर कंसलटेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी ने कहा की गर्भवती महिलाओं को खासतौर से गर्भावस्था की तीसरी माह में स्वाइन फ्लू की आशंका काफी अधिक होती है. गर्भावस्था के दौरान स्वाइन फ्लू मां और बच्चे की सेहत के लिए काफी गंभीर होता है, इसकी वजह से गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं जैसे समयपूर्व प्रसव की संभावना बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि फॉर्टिस में हमारी टीम इस प्रकार की जटिलताओं से निपटने में पूरी तरह सक्षम है. पूजा के उपचार के दौरान विभिन्न विभागों की टीम ने भरपूर सहयोग दिया, और पूरी उपचार प्रक्रिया को सुगम बनाया.
स्वस्थ होने के बाद पूजा ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि आज मेरे नवजात मेरे साथ हैं. इस ‘मातृत्व’ दिवस पर मेरे पास मेरे खूबसूरत बच्चे हैं जो बिल्कुल स्वस्थ हैं. मेरे लिए वाकई बड़ा मुश्किल समय था. मैं काफी कमजोर और असहाय महसूस कर रही थी, मैं हर हाल में अपने बच्चों को बचाना चाहती थी, लेकिन इंफेक्शन फैल चुका था, जिसकी वजह से मैं खुद काफी जोखिम ग्रस्त और अस्वस्थ हो गई थी. लेकिन मैंने अपने बच्चों के लिए भरपूर संघर्ष किया जैसे कि हर मां करती है. मेरा समय बेशक मुश्किलों से भरा हुआ था लेकिन बच्चों के साथ मैं खुद को बेहद खुश हाल मानती हूं.