PNN/ Faridabad: सेक्टर 2 बल्लमगढ़ में आज आयोजित राहगीरी कार्यक्रम में वर्ल्ड ऐड्स डे तथा वर्ल्ड कंप्यूटर लिटरेसी डे मनाया गया. राहगीरी कार्यक्रम में मंत्री पंडित मूलचंद शर्मा और बल्लमगढ़ एसडीएम त्रिलोकचंद मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत हुए.

इस दौरान बी.के अस्पताल की टी.बी एवं एचआईवी विभाग की इंचार्ज डॉ शीला भगत की अध्यक्षता में डॉ संजीव भगत, डॉ हरीश आर्य, डॉ. मान सिंह, टी.बी एंड एचआईवी सुपरवाइजर सुभाष गहलोत सहित एचआईवी का पूरा स्टाफ जिसमें प्रीति, कविता, अनीता, साधना, सुनीता, सुमित, मुकेश, संगीता, रंजू, कृष्णा, पंकज आदि ने लोगों को एचआईवी/एड्स के बारे में विस्तार से बताया.

इस दौरान लगभग 80 के करीब लोगों ने एचआईवी का टेस्ट भी करवाया.

डॉक्टर शीला भगत ने बताया कि एड्स के कारणों और उसकी रोकथाम के प्रति लोगों को जागरू करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार पूरी दुनिया में करीब साढ़े तीन करोड़ लोग एचआईवी पीड़ित हैं. इनमें से केवल 62% लोगों को ही समय पर इलाज मिल पाता है.

आइए आपको बताते हैं कि आखिर एड्स फैलता कैसे है और इसके बचाव का एकमात्र रास्ता क्या है.

क्या है एड्स होने के कारण?

– एचआईवी पॉजिटिव असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से होता है.
– एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस)  मरीज के शरीर में इस्तेमाल किए हुए इंजेक्शन को दूसरे व्यक्ति में इस्तेमाल करने से यह बीमारी हो सकती है.
– इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का ब्लड किसी दूसरे व्यक्ति में चढ़ाने से एचआईवी वायरस हो सकता है.
– अगर किसी गर्भवती महिला में एचआईवी वायरस होता है तो उससे जन्म लेने वाले बच्चे में भी यह वायरस आ सकता है. इनफेक्टेड मां के बच्चे को स्तनपान कराने से भी एचआईवी फैलता है.

ये हैं एचआईवी के लक्षण

यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके शुरुआती दिनों में किसी तरह के लक्षण सामने नहीं आते हैं. व्यक्ति बिल्कुल साधारण दिनों की तरह सेहतमंद रहता है. कुछ साल बाद ही इसके लक्षण सामने आते हैं, जो इस प्रकार हैं:

– बुखार का रहना
– नियमित रूप से शरीर में थकावट महसूस करना.
– सूखी खांसी होना
– वजन का कम होना
– स्किन, मुंह, आंखों के नीचे या नाक पर धब्बे पड़ना
– समय के साथ याददाश्त कमजोर होना
– शरीर में दर्द रहना

कैसे रहें सुरक्षित?

एड्स को जड़ से खत्म करने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक वैक्सीन तलाश रहे हैं. हालांकि अभी तक इसे पूरी तरह कंट्रोल करने में सफलता नहीं मिल पाई है. ऐसे में एड्स से बचाव ही एड्स से सुरक्षा है. इसके कारणों की सही पहचान कर आप एचआईवी संक्रमित होने से बच सकते हैं.