PNN India: कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस वायरस के कहर से पूरा विश्व थर्रा गया है। ऐसे में हाल ही में चाइना में हुए एक शोध में इस वायरस को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।

चीन के हुबेई शहर में एक शोध के दौरान खुलासा हुआ कि ये कोरोना वायरस एक बल्ड ग्रुप के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है।

इन बल्ड ग्रुप पर हावी होता है वायरस

शोध के बाद जो नतीजे निकलकर आए हैं उसके हिसाब से बल्ड ग्रुप A को सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमित करता है। इसके साथ ही ये भी पता चला कि जिनका ब्लड ग्रुप O है उन्हें संक्रमति होने में ज्यादा समय लगता है।

चीन में इस तरह का ये पहला शोध है. ये कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित वुहान के रेनमिन, जिनिंतान और शेनजेन अस्‍पताल में की गई. ये स्टडी 2173 लोगों पर की गई है. चाइना की रिसर्च मैगजीन MedRxiv में स्टडी छपी है. चाइना के सबसे प्रतिष्ठित अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी इसे प्रकाशित किया है.

वुहान के सेंट माइकल अस्‍पताल में तैनात डॉ प्रदीप चौबे कहते हैं कि ऐसी स्टडी हुई है और देखने में आया है कि ब्लड ग्रुप ए वाले ज्यादा ससेप्टिबल हैं. मान लीजिए कि यहां खड़े 32 लोग एक ग्रुप के हैं. अगर उन्हें एक साथ फीसदी में देखें तो 100 होंगे अब इसमें से 37% ए ग्रुप वालों को कोरोना की संभावना है.” स्टडी से पता लगा है कि ब्लड ग्रुप B और AB का कोरोना के प्रति अलग से कोई खास व्यवहार नहीं दिखता लेकिन ब्लड ग्रुप O वाले कोरोना की चपेट में कम आए.
हालांकि भारतीय डॉक्टर्स की इस स्टडी पर अलग-अलग राय है. अपोलो हॉस्पिटल के हीमेटो ओंकोलाजी विभाग के डॉ गौरव खरया कहते हैं कि कुछ मामलों में ऐसा देखा गया है कि एक खास ब्लड ग्रुप वाले खास बीमारी के प्रति ज्यादा ससेप्टिबल होते हैं. जैसे कि सिकिलसेल वाले O ब्लड ग्रुप वाले ज्यादा होते हैं लेकिन इस चाइनीज़ स्टडी का सैंपल साइज़ कम है और कोरोना नया है, इसलिए ऐसे नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा और अगर ऐसा है भी तो इस बीमारी के लिए मेडिसिन देने पर हरेक ब्लड ग्रुप पर वो मेडिसिन समान रूप से काम करेगी.

वही NDMC के आयुर्वेदिक अस्पताल के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर डीएम त्रिपाठी कहते हैं कि हम कहते हैं कि ए ग्रुप रिसेप्टर है और  ब्लड ग्रुप ओ यूनिवर्सल डोनर है और देने वाले को कुछ नहीं होता पर देखा जाए तो कोरोना का संबंध ब्‍लड ग्रुप से नहीं हैं. ऐसा थोड़े ही होगा कि वायरस ग्रुप देखकर आ रहा है बल्कि इसका संबंध कमजोर प्रतिरोधक क्षमता से है. ज्यादा उम्र वालों की प्रतिरोधी क्षमता कम होती है इसलिए उनकी मौत ज्यादा हुई है. यानी कोरोना का अटैक आपके अंदर रोग से लड़ने की ताकत पर निर्भर है. (सोर्सेस न्यूज़)