PNN/ Faridabad: वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के लिये फरीदाबाद में वृहद स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आज डबुआ थाने में पहुंचकर एसएसओ संदीप कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों को टीबी रोग के फैलने के लक्षण, बचाव व उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
इस मौके पर धर्मवीर शर्मा, ट्रीटमेंट सुपरवाइजर-टीबी, ने बताया कि टीबी दो प्रकार की होती है। पलमोनरी यानी फेफड़े की टीबी का संक्रमण खांसने व छीकने से हवा के जरिये एक से दूसरे में फैलता है। टीबी का इलाज सम्भव है। छह से आठ माह तक इलाज से रोग ठीक हो जाता है। बीच में इलाज छोड़ना नही चाहिए.

धर्मवीर शर्मा ने कहा कि यह लोगों का भ्रम है कि टीबी एक लाइलाज बीमारी है। ऐसे भ्रम को अपने जहन से दूर कर दीजिए, क्योंकि टीबी का नियमित रूप से यदि इलाज किया जाए तो यह जड़ से मिट सकती है। साफ-सफाई पर जोर देते हुए कहा कि कई प्रकार के संक्रमण गन्दगी के कारण फैलते है। टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है.

धर्मवीर शर्मा ने बताया कि सरकार सभी टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान 500 रुपये प्रति माह की मदद उलब्ध करा रही है। इसके अलावा जो भी व्यक्ति टीबी के मरीज की पुष्टि करवाएगा उसे भी ₹500 दिए जाता है.

अंत में उन्होंने कहा कि लोगों को टीबी के प्रति जागरुक करके टीबी मुक्त भारत के निर्माण का सपना पूरा किया जा सकता है.

इस मौके पर राजकुमार शर्मा, लैब सुपरवाइजर, प्रियंका, टीबी एवं एचआईवी सहित अन्य हेल्थ कर्मी मौजूद रहे.