PNN/ Faridabad: अरावली की पहाड़ियों की मनमोहक छठा के बीच चल रहे 34वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में दूसरे रविवार को एक लाख 75 हजार से अधिक दर्शक पहुंचे। इससे पिछले नौ दिनों में अब तक मेले में भ्रमण करने वाले पर्यटकों की संख्या दस लाख से अधिक पहुंच चुकी है। रविवार को भारी भीड़ के चलते स्थिति यह थी कि सभी पार्किंग फुल थी और मेला परिसर में चारों तरफ लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही थी। 16 दिन चलने वाले अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में इस बार तीन शनिवार व रविवार दर्शकों को मेले का आनंद लेने के लिए मिल रहे हैं। यही वजह है कि रविवार को छुट्टी होने के चलते मेले में आने वाले दर्शकों की संख्या अधिक रहती है। दूसरे रविवार को भी मेले में यही स्थिति रही। सुबह 12 बजे तक सभी पार्किंग फुल हो चुकी थी और मेला परिसर में चारों तरफ लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही थी।

वहीं रविवार को मेले का जादू यहां आने वाले लोगों पर इस कदर छाया था कि लोग मेले में भारी भीड़ के बावजूद पूरा मजा ले रहे थे। फूड कोर्ट पर भारी भीड़ थी। यहां राजस्थानी स्टाल, गोहाना की जलेबी, बिहार के लिट्टी चोखा के स्टालों पर तो लोगों की वेटिंग देखने को मिली। छोटी चौपाल के साथ-साथ डीजे के धुनों पर भी युवा जमकर थिरके। बंचारी और बीन वादक भी मेले का समां बांध रहे थे।
यहां आने वाले युवा व बच्चे थकावट के बावजूद थिरकने से अपने आपको नहीं रोक पा रहे थे। लोगों ने परिवार सहित मेले में पहुंच कर मस्ती की और अलग अलग व्यंजनों का लुत्फ उठाया। बच्चों के साथ साथ बड़ों ने भी बड़ी चौपाल के साथ बने सेल्फी पाइंट पर दिनभर फोटों खिचवाए। मेले की बानगी ऐसी थी हर कोई देसी व विदेशी कलाकारों की ताल में ताल मिला कर डांस करते नजर आए। कोई बीन की धुन पर तो कोई ढोल की थाप में नृत्य कर रहा हैं। नाचते गाते देसी विदेशी पर्यटक सूरजकुंड मेले को और भी भव्य रूप दे रहें हैं। प्रदेश की परम्परागत कलाओं के रंगों व फिल्मी धुनों पर स्कूली छात्रों ने जमकर मस्ती की। पालीनाथ बीन पार्टी व राजस्थानी ढोल ताशे के कलाकार रणधीर ने बताया कि मेले में पहुंच रहे पर्यटकों की दिवानगी देख कर उन्हे थकावट महसूस नहीं होती बल्कि वे खुद भी बच्चों के साथ डांस करने लगते हैं। राजस्थान के रणधीर ने बताया कि पर्यटकों की मस्ती उनकी टीम में और भी जोश भर देती है। जिस कारण वे सारा दिन ढोल ताशे को बजाते बजाते नहीं थकते।

दिल्ली से मेले में पहुंचे छात्र दिनेश, निशा, गौरव, आदित्य ने बताया कि वे पिछले तीन साल से यहां आ रहे हैं। सूरजकुंड मेले में न केवल हमारी प्राचीन हस्तलिपी कला, संस्कृति का ज्ञान मिलता है बल्कि मेले में मस्ती का साथ सिखने का बहुत मिलता है। इसी प्रकार करनाल, गुरूग्राम से परिवार सहित आए अनिल व गजराज ने बताया कि मेले के दौरान वे शनिवार व रविवार को जरूर आते है। बच्चों को भी हर साल इस मेले का इंतजार रहता है ताकि वो जमकर मस्ती कर सके और चटपटे व्यंजनों का मजा ले सकें।