PNN/ Faridabad: सामाजिक सहभागिता से देश से 2025 तक टीबी और 2030 तक एचआईवी जैसी घातक बीमारियों को देश से खात्मा करने की दिशा में चल रहे पहल के तहत आज डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन कमिटी (डीसीसी) की एक मीटिंग सेक्टर-12 स्थित, उपायुक्त कार्यालय में आयोजित किया गया.

डीसीसी मीटिंग की अध्यक्षता उपायुक्त की अनुपस्थिति में एडीसी आर.के सिंह ने ली. मीटिंग में सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार, नोडल ऑफिसर डॉक्टर शीला भगत, डॉ संजीव भगत, डॉ मान सिंह और डॉ महेंद्र प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.

मीटिंग में टीबी और एचआईवी को नियंत्रित करने और निर्धारित समय तक टीबी और एचआईवी मुक्त जिला बनाने पर गहनता से चर्चा किया गया. एडीसी ने इस कार्य के लिए सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोगों में जितनी जागरूकता बढ़ेगी उतनी जल्दी ही इन भयावह बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है.

एडीसी ने कहा कि जो लोग टीबी के इलाज से वंचित है और अपने साथ-साथ दूसरों को भी टीबी रोग से संक्रमित कर रहे हैं, ऐेसे रोगियों का पता लगाकर उनका इलाज शुरू करवाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे एचआईवी पॉजिटिव रोगियों एवं टीबी रोगियों के अधिक संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों एवं दूरस्थ गांव-ढाणियों, खनन क्षेत्र, कुपाेषित वर्ग, कच्ची बस्तियों, झुग्गी झौपड़ी, ईंट-भट्टे, निर्माण आदि क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा डोर-टू-डोर सर्वे किया जाए। चिन्हित संभावित टीबीग्रसित घरों एवं सदस्यों पर कड़ी नजर रखा जाए.

वहीं नोडल ऑफिसर डॉ शीला भगत ने pnn से बात करते हुए बताया कि बैठक में टीबी के खात्मे को लेकर उपस्थित अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर लोगों में क्षय रोग के लक्षण जांचेगी तथा छिपे हुए केस की तलाश करेगी। यदि इस रोग के लक्षण किसी व्यक्ति में पाए जाते हैं तो उनका जल्द से जल्द उपचार शुरू करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीबी की बीमारी का इलाज संभव है और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी का नि:शुल्क इलाज होता है।

डॉ शीला भगत ने कहा कि टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों का निवारण भी किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सरकार के टीबी मुक्त अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। लोग टीबी की बीमारी को अनदेखा न करें, बल्कि तुरंत उपचार शुरू करवाएं। इलाके में किसी भी व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में उपचार करवाएं। उन्होंने कहा कि भारत में प्रति मिनट दो व्यक्ति संक्रमण के कारण टीबी के शिकार हो जाते हैं। थूक से प्रतिवर्ष 10 से 15 व्यक्तियों के संक्रमित होने की संभावना होती है.

डॉ शीला भगत ने टीबी के लक्षणों पर प्रकाश डालते कहा कि टीबी मुख्य रूप से बुखार, भूख न लगना, वजन का घटना, 2 हफ्ते से अधिक खांसी आना व खांसी में खून आने के साथ होता है। उन्होंने कहा कि इसकी पहचान हो जाने पर जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करना चाहिए और इसका उपचार शुरू कर देना चाहिए। समय पर इलाज शुरू करने से रोगी की जान बचाई जा सकती है.

इस मौके पर जिला टीबी विभाग के कर्मचारियों में डिस्ट्रिक्ट टीबी एंड एचआईवी कोऑर्डिनेटर सुभाष गहलोत, रविंदर, हिम्मत सिंह, कविता, प्रीति, अनीता, शिक्षा विभाग के कर्मचारी, ट्रांसपोर्ट ऑफिसर, ममता एनजीओ से काशीराम, रेड क्रॉस सोसाइटी, पहल फाउंडेशन आदि ने हिस्सा लिया.