PNN/ Faridabad: सही कहा गया है कि कुदरत का करिश्मा अजीब है. अगर उसकी कृपा हो तो, नहीं उम्र का बंधन आड़े आता है ना ही कोई विवशता. ऐसा ही करिश्मा देखने को मिल रहा है फरीदाबाद के गांव लुधियापुर में, जहां इस रमजान के पाक महीनें में लोग खुदा की इबााबत में रोजा रखते है.

आम लोग चिलचिलाती गर्मी व प्यास से बेहाल रह रहे हैं वहीं शिक्षक व हाफिज इरफान खान की बेटी (5 वर्ष 18 दिन) की तराना ने रमजान का पहला रोजा रख कर मिशाल पेश किया है. रमजान के इस पाक महीने की और अपने माता-पिता का रुझान व आस्था को देखते हुए बच्ची ने रोजा रखने की इच्छा जताई. तराना ने अपने अम्मी से कहा कि वह पूरे महीनें रोजा रखना चाहती है. इस बात पर पूरे घर वाले छोटी बच्ची को समझाने में लग गये, कोई गर्मी का बहाना बता समझा रहा था तो कोई उम्र का उदाहरण दुसरे बच्चों से कर रहा था. इन सब बातों को दर किनार करते हुए तराना ने अपनी रोजा रखने की बात पर अटल रही. और पहली रोजा मुकम्मल कर मिशाल कायम की.

“यह मेरी लड़की की जिंदगी का पहला रोजा है, मेरे लड़की की उम्र 5 साल 18 दिन है. अल्लाह रब्बुल इज्जत मेरी लड़की की रोजे को कबूल फरमाए- पिता इरफान खान”

तराना के पिता इरफान खान ने बताया कि तराना ने अपनी जिद्द और आस्था के चलते रोजा रखी है. जब हमने उसे रोकना चाहा और कहा कि इस बार रमजान गर्मियों में पड़ा है, यह बेहद मुश्किल होगा तो उसने कहा कि वह पूरा दिन पंखे में बैठेगी लेकिन रोजा रखेगी. तराना की बात सुन सभी घर वाले हैरान हो गये और फिर उसके रोजा रहने की तैयारी में जुट गये. तराना के रोजा रखने पर परिवार वालों ने आसपास के रोजेदारों में मिठाईयां भी बांटी.

धार्मिक मान्यता है कि पवित्र माह रमजान में रोजा रखने वालों पर अल्लाह की रहमत की बारिश होती है। कहा जाता है रमजान के माह में अल्लाह हर एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सबाब अता फरमाते हैं.