PNN/ Faridabad: भगवान परशुराम की जयंती अक्षय तृतीय के दिन 25 अप्रैल को घरों में रहकर सादगी से मनाया गया। लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में पूजा अर्चना कर दीप प्रज्जवलित कर भगवान परशुराम की आराधना की गई।

इसी कड़ी में पंडित एल आर ग्रुप ऑफ इंसटीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ एल सी भारद्वाज ने बताया कि संस्थान की ओर से भगवान परशुराम जयंती हर वर्ष धूमधाम से मनाई जाती हैं। लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते जयंती सादगी से मनाए जाने का फैसला लिया गया, और जरुरतमंद लोगों की सहायता करने की फैसला लिया गया।

न्याय के देवता भगवान परशुराम की पूजा करती है सभी कष्टों का निवारण: डॉ एलसी भारद्वाज

इस मौके पर संस्था के चेयरमैन डॉ एल सी भारद्वाज ने भगवान परशुराम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों अश्वत्थामा, राजा बलि, परशुराम, विभीषण, महर्षि व्यास, हनुमान, कृपाचार्य इनमें से एक हैं। भगवान विष्णु के छठे अवतार एवं ब्राह्म्ण जाति के कुल गुरु परशुराम, जिनकी जयंती वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार इस दिन जो कुछ भी दान किया जाता है वह अक्षय रहता है यानि इस दिन किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता है।

डॉ भारद्वाज ने बताया कि सतयुग का प्रारंभ अक्षय तृतीया से ही माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के परम भक्त परशुराम न्याय के देवता हैं, जिन्होंने 21 बार इस पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था।